Is Law Truly Equal for All? Article 14 Debate
क्या कानून सचमुच सबके लिए बराबर है? जब न्याय का तराजू झुकने लगे, तब लोकतंत्र खतरे में होता है “कानून […]
क्या कानून सचमुच सबके लिए बराबर है? जब न्याय का तराजू झुकने लगे, तब लोकतंत्र खतरे में होता है “कानून […]
मनुष्य बड़ा विचित्र है। वह मंदिर में जाकर कहता है—”ईश्वर सबमें समान है।” संविधान कहता है—”सभी नागरिक समान हैं।” नेता
How LLB Education Is Being Systematically Diluted in India Legal education in India is facing a silent but dangerous collapse.
आज हमारा देश एक बहुत ही विभाजित और अस्थिर दौर से गुजर रहा है।सरकारों ने धर्म] जाति और भाषा के
लाभ या अंध विश्वास ? हर वर्ष जब दीपों का त्योहार आता है, हम बिना सोचे-समझे वही पुरानी परंपराएँ दोहराते
प्रोटेस्ट किस हद तक होना चाहिए — मर्यादा, कानून और चेतावनी हमारे देश में प्रोटेस्ट करना, असंतोष जताना और सत्ता
क्रांति की असली जड़ें किसी महल या किसी संसद के गलियारे में नहीं बल्कि प्रत्येक घर के रसोई में, उस
देश में 75% से ज़्यादा लोग पिछड़े वर्ग से हैं — यह कोई कल्पना नहीं, सरकारी आँकड़ों का सच है।
मैं वही हूँ जो मैं हूँ। मेरी आवाज़ सुनो। उठो और उन सारी पुरानी ज़ंजीरों को तोड़ दो। चाहे तुमने
I am who I am. Listen to me. Get up and break all those old chains. No matter how many