भय का ज़हर
भय का ज़हर एक कहानी लंबे समय से सुनाई जाती है। कहा जाता है कि एक देश में एक व्यक्ति
भय का ज़हर एक कहानी लंबे समय से सुनाई जाती है। कहा जाता है कि एक देश में एक व्यक्ति
भागते रहो… लेकिन पहुँचना कहाँ है? हम भागे जा रहे हैं।हमारा समाज भागा जा रहा है।देश भाग रहा है।दुनिया भाग
स्वयं की खोज में निकल,धर्म की खोज को छोड़ दे,परमात्मा तू खुद बन,दूसरे परमात्मा को पूजना छोड़ दे। अपने भीतर
Guardian कौन है — संविधान या कोई व्यक्ति? एक सवाल Supreme Court से नहीं, हमसे है! एक वीडियो में मैंने
कानून किसके लिए है? जब सत्ता न्याय से बड़ी हो जाए अगर आपकी जेब चाँदी की है और आपके पैर
गुलामी किसे कहते हैं? क्या संविधान आज भी ज़िंदा है? एक सवाल है। बहुत छोटा–सा सवाल। लेकिन यदि तुमने इसे
What Is Slavery? Is the Constitution Still Alive? There is a question. A very simple question. But if you ask
जब सत्ता संविधान से बड़ी दिखाई देने लगे, तब लोकतंत्र को खतरे की घंटी सुननी चाहिए लेखक: परमात्मा “लोकतंत्र में
क्या भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित है? जब बोलने से पहले नागरिक सोचने लगे, तब लोकतंत्र को स्वयं से
क्या कानून सचमुच सबके लिए बराबर है? जब न्याय का तराजू झुकने लगे, तब लोकतंत्र खतरे में होता है लेखक: