Ultimate Clash: Fundamental Rights vs Political Power
जब सत्ता संविधान से बड़ी दिखाई देने लगे, तब लोकतंत्र को खतरे की घंटी सुननी चाहिए लेखक: परमात्मा “लोकतंत्र में
जब सत्ता संविधान से बड़ी दिखाई देने लगे, तब लोकतंत्र को खतरे की घंटी सुननी चाहिए लेखक: परमात्मा “लोकतंत्र में
क्या भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुरक्षित है? जब बोलने से पहले नागरिक सोचने लगे, तब लोकतंत्र को स्वयं से
क्या कानून सचमुच सबके लिए बराबर है? जब न्याय का तराजू झुकने लगे, तब लोकतंत्र खतरे में होता है लेखक:
मनुष्य बड़ा विचित्र है। वह मंदिर में जाकर कहता है—”ईश्वर सबमें समान है।” संविधान कहता है—”सभी नागरिक समान हैं।” नेता
How LLB Education Is Being Systematically Diluted in India Legal education in India is facing a silent but dangerous collapse.
आज हमारा देश एक बहुत ही विभाजित और अस्थिर दौर से गुजर रहा है।सरकारों ने धर्म] जाति और भाषा के
लाभ या अंध विश्वास ? हर वर्ष जब दीपों का त्योहार आता है, हम बिना सोचे-समझे वही पुरानी परंपराएँ दोहराते
प्रोटेस्ट किस हद तक होना चाहिए — मर्यादा, कानून और चेतावनी हमारे देश में प्रोटेस्ट करना, असंतोष जताना और सत्ता
क्रांति की असली जड़ें किसी महल या किसी संसद के गलियारे में नहीं बल्कि प्रत्येक घर के रसोई में, उस
देश में 75% से ज़्यादा लोग पिछड़े वर्ग से हैं — यह कोई कल्पना नहीं, सरकारी आँकड़ों का सच है।